Corruption in Ration Shops

May 23rd, 2010 by admin

Ration & Public Distribution System

Research Team

Mohd. Rafique Shaikh

Aabid Sharif

Mohd. Ishaque Shaikh

Meraj Ansari

Harikesh Gupta

राशन की जानकारी इंटरनेट से ली हुई

English Summary:

Those living in Maharashtra will soon have computerized, barcode-based ration cards.
The Maharashtra government has embarked on an ambitious plan to issue computerised, barcode-based ration cards within the next eight months in a bid to overhaul the operations of the Public Distribution System.
Spanco Telesystems and Solutions Ltd, a leading systems integration and business process outsourcing companies has bagged from the Food, Civil Supplies and Consumer Protection department to execute this plan.
The scheme is designed to ensure that the right beneficiary avails the desired amount of food grains and other benefits. The entire rationing system in the state will undergo a sea change with the issuing of over 1.8 crore (18 million) computerised barcode-based laminated ration cards to every household.
In a media statement, Kapil Puri, chairman and managing director of Spanco, said: “We are proud to partner with the government of Maharashtra on a project like this which will benefit households across the length and breadth of the state. It has been our constant endeavor to provide innovative and holistic solutions for complex issues.”
The project will be completed in three years and cover about 106,740 fair price shops, 354 taluka supply offices, 33 district supply offices, 5 regional offices, and 44 rationing offices.
The scope of work includes data entry, digitisation of the existing 1.8 crore beneficiaries, capturing of photograph and fingerprints of the head of the family of each household, use of biometric fingerprint matching to avoid duplication of cards, printing and preparation of barcode-based laminated ration cards.
Apart from this all the 474 FCS offices, including head office, divisional offices and taluka offices have to be networked by using MPLS/VPN broadband connectivity. A high-tech data centre shall be deployed and be connected through 4Mbps link to the rest of the department offices across the state.
All the FCS offices will have to be given a desktop computer along with printers and scanners, and 33 various application software modules will have to be developed and integrated. All the 106,740 fair price shops shall be issued with point of sale terminals having smart card, magnetic stripe and barcode readers to read the computerized ration card.
The transaction done at the ration shop shall be stored in the POS terminal and uploaded to the data centre in regular intervals. About 900 GPS instruments shall be fitted in the vehicles carrying food grains from FCI go-down to state godowns and they will be tracked from the data centre, so that pilferage can be stopped.
The entire solution shall be designed by using centralised Service Oriented Architecture (SOA) and all the applications will be hosted from the data centre.
Spanco has partnered with Mastek as its partner in this project for developing the entire application software. Spanco will deploy 1,100 people across the state to run the project and an additional 1,500 staff to do the data entry and digitisation of all the existing 1.8 crore beneficiary records to complete the entire scope of work and make the system live within 8 months of signing the contract.
The beneficiary/household will avail the computerised ration card and pay a nominal fee fixed by the department for it.
The fees for various types of cards like, Annapurna, Antyordaya, BPL, APL and White, shall be notified by the government through a gazette notification।
पिछली फाईनल रिपोर्ट में हम ने कुछ सुझाव दिए थे । जब हमने राशन की और जानकारी के लिए इंटरनेट की मदद ली तो उनकी रिपोर्ट और हमारे सुझाव में काफी समानताये दिखी । जो की हमारे लिए plus point है । Posted by Ration Par Anaaj Na Milne Ka Zimmedar Kaon ? Sarkaar Ya Rationing System ? at 12:53 AM 0 comments Wednesday, September 2, 2009

Food Corp. of India पर visit

११.०८.०९ को मे अनाज के गोदाम यानी were house पहोंचा जहा से सभी रेशन दूकान पर अनाज supply किया जाता है। बोरीवली और कांदीवली station के बीच बना है यह गोदाम। दूर से ही देखने से समझ में आता है के यह सरकारी गोदाम है। बाहर गेट पर बड़ा पुराना सा Board लगा था जिस पर लिखा था Food Corporation Of India यानी FCI


मै ने देखा के गेट पर खड़ा गार्ड अनजान लोगो को अन्दर जाने नही दे रहा है। मै सोचने लगा के अन्दर बैठे किसी भी अफसर का नाम मै नही जानता हूँ, गार्ड को क्या बोलू के मुझे किस से मिलाना है। अगर मै गार्ड से ये कहू के मै research के सिलसिले में यहाँ आया हूँ तो वह मुझे अन्दर जाने नही देंगा। अब मै अन्दर जाऊ तो कैसे ? अचानक मै ने देखा के चंद लोग बिना इजाज़त अन्दर चले गए और गार्ड ने उन से कुछ पूछा भी नही। मै ने भी दिल में अल्लाह का नाम लिया और गेट के अन्दर घुसता चला गया ना गार्ड ने मुझे रोका और ना ही कुछ पूछा । गेट से लग कर वज़न weight bridge (वज़न काटा ) था । रास्ते के सीधे हाथ पर कतार से गोदाम बने हुऐ थे जहा दो ट्रक खड़े थे और बाए हाथ पर आफिस थे ।
मै ने अंदाजा लगाया की मुझे जिन अफसरों से बात करना है वे मुझे यही मिलेगे । और एक ऑफिस के अन्दर चला गया । बड़ी सी टेबल के पीछे कुर्सी पर एक अधेड़ उम्र के सज्जन बैठे थे उन के टेबल पर लकडी की एक तख्ती रखी हुई थी जिस पर लिखा था Mr V.G. Khobragade.
मै ने उनहे नमस्ते कहा उन्होंने मुझे सामने रखी कुर्सी पर बैठने का इशारा किया । मैंने उन्हें अपने आने का मकसद बताया तो वह चोक गए फिर उन्होंने मेरा I.D. Proof माँगा , मैंने पिछली रिसर्च के पुकार का पहचान पात्र दिया , देखने के बाद कहा “पूछए क्या पूछना है ? मेरा नाम रफीक है और सर आप का नाम ? उन्होंने अपना नाम बताया और कहा के वह यहाँ के मेनेजर है । मैंने दूसरा सवाल किया । क्या वजह है के रेशन पर लोगो को उनके हिस्से का अनाज नही मिल पा रहा है ?
पहले आप को बता दू के में सेन्ट्रल goverment का आदमी हूँ महाराष्ट्र सरकार हमें आर्डर देती है के उन्हें कितना अनाज चाहिए और हम उन्हें उतने अनाज का D. O. बना कर सप्लाये कर देते है । आगे वह अनाज किधर जाता है हमें नही मालूम ।
जब सरकार आप के गोदाम में अच्छा अनाज भेजती है तो वह अनाज रेशन दूकान पर जाते ही ख़राब कैसे हो जाता है ? मैंने दूसरा सवाल किया ।
\’अनाज हमें सरकार रेलवे द्वारा भेजती है । पिछले हफ्ते हमें चार कंटेनर में कुछ कीडे दिखे , वह कीडे अनाज की बोरियो से नही गिरे थे और न ही वह अनाज के कीडे थे मगर हम ने अपनी delivery report में यह भी लिखा के हमें कोन से कंटेनर में कितने कीडे मिले \’ उन्होंने एक फाईल मेरे सामने रख दी जिस पर कीडो के बारे में लिखा हुआ था ।
फिर वह उठेकर बाहर चले गए और आते वकत अपने साथ किसी दूसरे सज्जन को ले आए । इन का नाम S.P. gunvir है । मैं D.O. इन्हे देता हूँ और ट्रक में लोड करवाने के लिए ये आर्डर आगे बढवा देते है । हम से लिया हुआ अनाज किस रेशन दुकान पर जाता है हमें कुछ पता नही , और ये पता करना हमारा कम भी नही है \’
V.G. Khobragade ने छुपे लफ्जों में कह दिया के बाहेर की कालाबाजारी से उन का कोई लेना देना नही है ।
मैंने झट से पूछ लिया “ठीक है आप का इन मामले से कोई लेना देना नही मगर मै आप से एक बात पूछना चाहता हूँ की जब आप को भारत सरकार अच्छी किस्म का अनाज देती है और अपने कंटेनर से अच्छा अनाज उतारा आप ने महाराष्ट्र सरकार को अच्छा अनाज सोपा आप का कम ख़त्म । मगर जब आप किसी रेशन दुकान पर रेशन दुकानदार को ख़राब अनाज देते हुए देखते है तो आप के अन्दर कुछ बेचैनी नही होती? की आप के अच्छा अनाज देने के बाद भी रेशन दुकानों पर ख़राब अनाज दिया जारहा है ? जो के ख़राब अनाज आप ने कभी delivery दिया ही नही है ।
“आप की बात बहोत जज़बाती है , हमें भी एसा लगता है के इस कालाबाजारी के ख़िलाफ़ कुछ करे मगर हम नही कर पाते , हो सकता है के उन लोगो का कोई बड़ा गिरोह हो जिस से हमें बाद में नुक्सान उठाना पड़े ।
जैसे ? मैंने पूछ ही लिया ।
ये लोग हमें किसी दूसरे बहाने से डराए या धमाकाये । हमें बदनाम करें और हो सके तो हमारा किसी ट्रैक से अक्सिडेंट करवा दे.
इतना कह के उन्होंने मुझसे हाथ मिलाया । इसका मतलब अब मुझे वहा से चलना चाहिए ।

हमारा प्रिजेक्ट फ़ोकस करता है …………………………….

१) राशन कार्ड के प्राकार पर

२) राशन कार्ड धारको की बेबसी पर

३) पब्लिक डिस्ट्रिबुशन सिस्टम (पी.डी.एस.) के अनाज वितरन पर

४) राशन सिस्टम की बदहाली पर

हमारे प्वाइट यह निकले……………………….

१)  पब्लिक डिस्ट्रिबुशन सिस्टम (पी.डी.एस.) ने राशन की दुकानो पर अनाज भेजा नही या

२)  दुकानदार ने (पी.डी.एस.) से अनाज मगवाया ही नही

३)  लोगो को राशन की पूरी जानकारी ही नही है.

४)

हम दावे के साथ कह सकते है…………………………………..

१)  साल २००९ मे (पी.डी.एस.) से मुम्बई मे नारन्गी राशन कार्ड धारको को कितना अनाज दिया गया .

२)  १०० परिवारो मे से ९४ परिवारो को अनाज नही मिला (इन्टरैव्यू के आधार पर )

३)

रेशन


पिछली फ़ाइनल रिपोर्ट में हम ने बताया था के किस कार्ड पर किसे कितना अनाज मिलना चाहिए.
मगर जिन के पास कार्ड ही न हो, वोह ग़रीब लोग जिन के पास घर ही न हो, वोह लोग सडको के किनारे फूटपाथ पर रहते है, जिन का कोई ठिकाना न हो?


ऐसे लोगो को `बेघर कार्ड` दिया जाता है. इस रेशन कार्ड पैर पूरे महीने में कभी भी 35 Kg . अनाज मिलने की सुविधा है, जोके 7 Rs. गेहू और 9 Rs.चावल के हिसाब से मिलता है.


हम अक्सर देखते है के सडको के किनारे हमारे देश के बुज़ुर्ग बूढ़े यहाँ-वह भीक मांग रहे है, उन की हालत बहुत ही ख़राब है, उन लोगो के लिए “अन्ना पूर्ण” नाम की योजना सर्कार  ने  रक्खी  है , जिस  में  65 साल  के  ऊपर  के  बुजुर्गो  के  लिए  10 Kg अनाज  बिलकुल  मुफ्त  दिया  जाता  है.


हमे  बहोत  सी  जगह  `बेघर  कार्ड ` और  अन्ना  पूर्ण  के  बहोत  से  हक़दार  दिखाई  देते  है , मगर  यह  लोग  सडको  पर  भिक  मांग  कर  या  दुसरे  कोई  छोटे–मोटे  काम  करके  अपना  गुज़ारा  करते  है, ऐसा क्या ?

1) इन्हें  इन  योजनाओ  के  बारे  में  जानकारी  ही  नहीं है.
2) यह  लोग  रेशन  की  दुकान  पर  गई  होंगे , मगर  दुकानदार  ने  उन्हें  भगा  दिया  होंगा ,
3) या  यह  लोग  ऐसे  ही  खुश  है  की  कों  दुकान  पर  जाये, बिना  हाथ  पैर   हिलाई  थोड़ी  से  मेहनत  से  उन्हें  कुछ- न -कुछ  मिल  रहा  है .


अगर  इन्हें  इन  योजनाओ  केबारे  में  जानकारी  नहीं  है  तो  उन्हें  बताय  कोन?
क्या यह  ज़िम्मेदारी  रेशन  ऑफिसर  की  नहीं  है ? वोह यह  देखे  की  उस  के  Working इलाके  में  इस  योजना  के  कितने  हक़दार  लोग है, वोह  उन्हें  खुद  जाकर  बताये  की  आप  लोगो  को  यहाँ-वहा हाथ  फैलाने  की  ज़रुरत  नहीं  है, सरकार  ने  आप  जैसे  लोगो  के  लिए  अलग  इन्तेजाम  किया  हुवा  है, आप  लोग  रेशन  की  दुकान  पर  जाकर  अपने  हिस्से  का  अनाज  ले  सकते  है, मगर  उस  बेचारे  के  पास  फालतू  समय  कहा  है ?
क्या  यह  ज़िम्मेदारी  रेशन  दुकानदार  की  नहीं  है? की  वोह  देखे  की  उस  की  दुकान  के  करीब  कोई  ग़रीब  भीख  मांग  कर  अपना  और  अपने  परिवार  का  पेट  भर  रहा  है. पर  दुकानदार  अपनी  दुकान  छोड़  कर  क्यों  जय  इन  बेकार  बातो के  लिए . अगर  कोई  भिकारी  उस की  दुकान  पर  आ  भी  जाता  है  तो  वोह  उसे  2-5 रूपए देकर  चलता  कर  देंगा.
तो  क्या  यह  ज़िम्मेदारी  हम  जैसे  Social  Workers की  नहीं  है? मगर  हम  भी  यही  सोचते  है  की  जब  रेशन  Officer को  उन  की  फिकर  नहीं  है. जब  दुकानदार  के  पास  समय  नहीं  है , तो  हम  क्या  कर  सकते  है, चाहे  हमारे  रिक्शा के  सामने  कोई  औरत  एक  बच्चा  गोद  में  और  एक  बच्चा  अपनी  कोख  में  लिए  हमारे  सामने  हाथ  फैले.


या  जब  हम  कभी  बरसात  के  मोसम  में  किसी  ठेले  वाले  से  गरम-गरम  पकोड़ो का  मज़ा  ले  रहे  हो  और  उस  समय  हमारे  सामने  बारिश  में  भीगती  हुई  कोई  बुढया हम  से  कुछ  खाने  को  मांगे,


या  फिर  फूट  पथ  पर चलते  समय  हमें  कोई  कमज़ोर  बीमार  भूखा  ग़रीब  बूढा  दिखाई  दे.
हम  क्या  करेंगे, हम  उन्हें  कुछ  पैसे  या  थोडा  खाना  देकर  अपना  पीछा  छुड़ा लेंगे,
मगर  हम  उन्हें  रतिओं  की  दुकान  पर  लेजाकर  यह  नहीं  बताएँगे  के  तुम्हे  हमारे  या  किसी  के  भी  आगे  हाथ  फैलाने  की  कोई  ज़रुरत  नहीं  है, तुम्हारे  लिए  सरकार  ने  अनाज  का  इन्तेजाम  किया  हुवा  है,
मगर  हम  यह  सब  क्यों  करे , हम  कोई  Mather Tressa थोड़ी  है, Social Work बोलने  सुनने  और  लिखने  के  लिए  ही  अच्छा  लगता  है.


जोगेश्वरी  का  इतिहास


· जोगेश्वरी  देवी  मंदिर  के  नाम  पर  इस  जगह  का  नाम  रखा  गया .


· एक  तरफ  w.e. highway है , तो  उसी  को  छूता  जोगेश्वरी-विखरोली link road है.


· बोरीवली  नेशनल  पार्क  का  जंगल  इसी  link road पर  समाप्त  होता  है .


· जिस  तरह  नेशनल  पार्क  के  पहाड़ो  पर  गुफाये  (canary cavas)  है, उसी  तरह  की
· दो  गुफा  जोगेश्वरी  में  भी  है . 
· जोगेश्वरी  स्टेशन  से  जो  रोड  निकलता  है , उसे  गुफा  रोड  कहते  है.


· गुफा  रोड  जहा  ख़तम  होता  है , वही  jogeshwari देवी  का  मंदिर  है.
· स्टेशन  से  बहार  निकलते  ही ismail yusuf college है , जिस  की  शुरुवात  1924 में  हुई  थी .


· W.E. highway के  करीब  का  इलाका  प्रेम  नगर  कहलाता  है . हमारी  पहले  research की  शुरुवात  यही  से  हुई  थी .


· ये  इलाका  1960-65 में  बसना  शुरू  हुवा .


· Colaba, bandra , और  andheri की  बस्तियों  को  यहाँ  shift किया  गया  था .

· ये  लोग  जहा  से  आये  थे  इन्होने  अपने  मोहल्ले  का  नाम  भी  वैसा  ही  रक्खा . जैसे  बांद्रा  से  आये  हुए  लोगो   ने  बांद्रा  प्लाट , कोलाबा  से  आये  हुए  लोगो  ने  कोलाबा  प्लाट  और  अँधेरी  से  आये  हुए  लोगो  ने  अँधेरी  प्लाट .


· बाद  में  मुंबई  के  तड़ीपार  अपराधी  भी  यहाँ  आना  शुरू  हुआ .


· जिन्होंने  आते  ही  यहाँ  की  ज़मीनों  पर  कब्ज़ा  करना  शुरू  किया ,
· कच्चे  माकन  बनाये  और  इन्हें  किराये  पर  देने  लगे ,
स्टेशन  के  करीब  ही  एक  shoes company थी , जिस  का  नाम   c.s.c. (carona shoes co.) था , इस  company में  काम  करने  वाले  workers ने  प्रेम  नगर  की  बस्तियों  में  किराये  से  माकन  लेकर  रहने  लगे ,
बाद  में  इन्द्रा  गाँधी  ने  photo pas system कानून  लागु  किया , जिस  में  जो  लोग  15 साल  से  एक  ही  किराये  के  माकन  में  रहते  है , वो  माकन  उस  का  हो  जायेंगा . लोग  रातो  रात  माकन  के  मालिक  बन  गए . मगर  आज  भी  उन  अपराधियों  के  बच्चो  का  दबदबा  कायम  है .


बांद्रा  प्लाट  , अँधेरी  प्लाट  , कोलाबा  प्लाट  , ईद गाह मैदान , रामगढ़  , ये  सब  इलाका  U.P. west Bengal और  Maharashtra से  आये  हुए  लोगो  के  थे . जिन  में  मुसलमानों  की  आबादी  करीब  70 % थी . आज  यहाँ  90% मुस्लिम  रहते  है .
प्रेम  नगर  जहा  समाप्त  होता  है  वहा  से  मेघ वाड़ी , सर्वोदय  नगर , मजास  वाड़ी , और  शंकर  वाड़ी  नाम  की  बस्तिया  शुरू  होती  है , जो  के  प्रेम  नगर  के  चारो  तरफ  फैली  हुई  है , और  यहाँ  हिन्दू  समाज  की  आबादी  90% है . हमारी  advance research का  आगाज़ (शुरुवात ) यही  से  होगा .

kuch Ration System ke Baare me

सालाना १५ हज़ार से 1 लाख की आमदनी वाले परिवार को नारंगी (orange ) राशन कार्ड दिया जाता है, जिसे APL Card भी कहते है उन्हें राशन की दुकान से हर महीने 20 किलो गेंहू और 15 किलो चावल सरकारी घोषणा के हिसाब से मिलना चाहिए, अगर उन के पास गैस की एक टांकी है तो उन्हें कुछ घासलेट भी मिलता है, मगर यह घासलेट सरकारी कोटे के हिसाब से कभी कम तो कभी ज्यादा होते रहता है,
सालाना 15 हज़ार से कम आमदनी वाले परिवार को गरीबीकी रेखा के निचे आने वाले परिवार कहा जाता है, उन्हें पीले रंग का राशन कार्ड दिया जाता है, जिसे BPL (Below Poverty line) card भी कहता है,

अनाज गेंहू चावल Shaker
Safed Kuch nahi Kuch nahi Kuch nahi
narangi 20kg. 7.00 per kg. 15kg. 9.50 per kg Kuch nahi
peele 20 kg. 5.00 Per Kg. 15 kg. 6.00 500 Gm. 13.50 PerKg
Antyoday 20 kg. 2.00 per kg. 15 kg. 3.30 per kg. 500 gm. 13.50 per kg
Annapurna 5kg. Free 5 kg. Free Kuch nahi

Sampoorn mumbai …..

अ परिमंडल अ परिमंडल में 14  उप  कार्यालय है,
1 आज़ाद मैदान     2 नूर बाग़  3 गिरगाव     ४ सी.पि. टैंक      5 ग्रांट रोड
6 महालक्ष्मी          7 मझगाव 8 कालाव्होकी  9 शिंदे वादी     10 धारावी
11 दादर                  12 शिवाजी पार्क              13 वरली           14 वरली सी-फेस
जैसे इलाके शामिल है,
अ परिमंडल ने अपने विभाग में 31-12-2009 यानी  2009 के आखिर तक कोनसे
और कितने राशन कार्ड दिए है , देखते है RTI द्वारा प्रापत रिपोर्ट,

राशन  कार्ड  के  प्रकार sankhya
नारंगी 497255
पीले 1037
सफ़ेद 84294
अन्त्योदय                                        253 वि, अन्त्योदय                                 253 बेघर                                               1181 गिरनी  कामगार                           1471 तात्पुरता                                        882 अन्नपूर्ण 2045 ————————————————– कुल                                                6085 6085
कुल  कार्ड  की  संख्या 588671

अ, परिमंडल नारंगी कार्ड धारको को वर्ष 2009 में मिले अनाज का विवरण , महीने के हिसाब से,
(किलो में )

महीने चावल गेहू शकर
January 114943 1051915 00
February 31225 701883 00
March 47600 817089 00
April 569424 2977299 00
May 239744 3834324 00
June 270754 3285069 00
July 205129 3216793 00
August 58800 522136 00
September 572257 722206 955262
October 432316 621856 901683
November 282126 679669 660445
December 174772 621444 867937
Total 2999090 19051683 3385327
  • अ, परिमंडल में 2009 तक कुल 491 दुकाने थी,
  • Mr. R.R. Mahamuni अ, परिमंडल के मुख्य अधिकारी है,
  • उन्होंने हमें बताया की अ, परिमंडल में किसी भी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं है, हम धारावी जैसी गुंजन बस्तियों में भी अच्छी सेवा दे रहे है,

परिमंडल ड, परिमंडल में 6 कार्यालय है, 1. बांद्रा (इस्ट)        2 बांद्रा (वेस्ट)           ३ सान्ताक्रुज़ 4 विले पारले           5 अँधेरी (इस्ट)         6 अँधेरी (वेस्ट)

ड, परिमंडल ने अपने विभाग में 31-12-2009 यानी  2009 के आखिर तक कोनसे और कितने राशन कार्ड दिए है , देखते है RTI द्वारा प्रापत रिपोर्ट,

रेशन कार्ड के प्रकार राशन कार्ड की संख्या
नारंगी 428745
पीले 54
सफ़ेद 90164
अन्त्योदय                              192
वि, अन्त्योदय                          73
बेघर                                        278
गिरनी कामगार                      606
तात्पुरता                                118 अन्नपूर्ण                               1045 ——————————————–
कुल                                      2312
2312








Total 521275


महीने चावल गेहू शकर
January 82916 764691 00
February 44365 2583577 00
March 33830 726140 00
April 260249 2158300 00
May 292594 2446582 00
June 249203 2798803 00
July 180133 1824188 00
August 15264 951187 00
September 180921 1365749 843281
October 688710 615016 713152
November 379321 661754 525410
December 520824 1233192 834222
Total 2928330 18129107 2916065

ड, परिमंडल में 2009 तक कुल 482 दुकाने थी,

परिमंडल
ई , परिमंडल में 8 कार्यालय है, 1,  भांडुप          2, किंग सर्कल     3, कुर्ला       4,चेम्बूर 5, घाटकोपर    6, मुलुंड               7,गोवंडी     8,विक्रोली

  • ई, परिमंडल ने अपने विभाग में 31-12-2009 यानी  2009 के आखिर तक कोनसे और कितने राशन कार्ड दिए है , देखते है RTI द्वारा प्रापत रिपोर्ट,
रेशन कार्ड के प्रकार
कार्ड की संख्या
नारंगी 815577
पीले 3071
सफ़ेद 101192
अन्तोदय                           1208 वि अन्तोदय                         579   बेघर                       933 गिरनी कामगार            1372 तात्पुरता                   366 अन्नपूर्ण                  4694 कचरा  वेचक                 27   ——————————————    कुल                                 9179 9179
Total 929019

ई, परिमंडल में नारंगी कार्ड धारको को वर्ष 2009 में मिले अनाज का विवरण , महीने के हिसाब से,
(किलो में )

महीने चावल गेहू शकर
January * 50000 * 2500000 00
February 73035 1011352 00
March 82879 1171981 00
April 1007357 5674011 00
May 337974 4457482 00
June 470867 5492925 00
July 361288 4702378 00
August 103734 2974643 00
September 842510 2201658 23850
October 544549 1363451 *  50000
November 788248 1085200 589821
December 576279 786663 1224445
Total 5236028 31316439 1838116


* अनुमान संख्या, रिकार्ड मिला नहीं, ई, परिमंडल में 2009 तक कुल 1085 दुकाने थी,
ई, परिमंडल के मुख्य अधिकारी है mr. Bajaj, मगर उन की ना मोजूदगी में हम ने RTI अधिकारी
Mr. Joshi से बात चीत की, उन्होंने हमें बताया की, हर दुकानदार अपने परिमंडल में अनाज, शकर या केरोसिन के पैसे भर कर वहा से Delivery Order लेता है, और उस Delivery आर्डर से बोरीवली के सरकारी गोदाम F.C.I. (Food Corporation Of India ) से अपने Order का अनाज उठता है, केरोसिन की Delivery उसे सरकारी गाडी से ही होती है,

ग, परिमंडल ग, परिमंडल में 4 कार्यालय है, 1, गोरेगांव    2, मलाड   3,कांदिवली 4,बोरीवली

ग, परिमंडल ने अपने विभाग में 31-12-2009 यानी  2009 के आखिर तक कोनसे और कितने राशन कार्ड दिए है , देखते है RTI द्वारा प्रापत रिपोर्ट,

राशन कार्ड के प्रकार कार्ड की संख्या
नारंगी 546556
पीले 424
सफ़ेद 108238
अन्त्योदय                          179 वि. अन्त्योदय                    173 बेघर                                   254 गिरनी कामगार                  161 तात्पुरता                            594 अन्नपूर्ण                          2584 ————————————————- कुल                                  3945 3945
ग, परिमंडल में कुल कार्ड की संख्या 659163

ग, परिमंडल में नारंगी कार्ड धारको को वर्ष 2009 में मिले अनाज का विवरण , महीने के हिसाब से,
(किलो में )

महीने चावल गेंहू शकर
January 136464 1314737 0
February 52501 829321 0
March 61217 966949 0
April 620582 4493188 0
May 271636 4559571 0
June 373078 5682565 0
July 312954 2364141 0
August 206901 2121271 0
September 468948 3043943 1065587
October 2115417 661581 1046735
November 892884 1619442 829988
December 750379 2207979 1034280
Total 6262961 29864688 3976587


ग,परिमंडल में 2009 तक कुल 619 दुकाने थी,
परिमंडल के मुख्य अधिकारी है Mrs. Vandana Suryavanshi . (Dep. Controller of Rationing Department.)

सम्पूर्ण मुंबई

पूरे मुंबई को राशनिंग डिपार्टमेंट ने चारविभागों में बांटा है . जिसे मराठी में परिमंडल  कहते है. अ, ड, ई और ग मुंबई के चार परिमंडल है.

अ. क्र. परिमंडल Addresses Phone No.
1 अ  (A) रेशन भवन, ५ वा माला, गांधी अस्पताल, बैल घोडा, परेल. मुंबई-12 2415 7592 24157571
2 ड  (D) अलका बिल्डिंग, पहला माला,सहार रोड, स्टेशन के पास, अँधेरी.(इस्ट) मुंबई-69 2684 4103 2684 3460
3 इ  (E) चंचल स्मृति बिल्डिंग, पहला माला, आंबेडकर रोड, वाडला.मुंबई-31 2412 5352 2412 5495
4 ग (G) कांदिवली हितवर्धक मंडल, एस. वी. रोड, कांदिवली (इस्ट) मुंबई-67 2807 1154 2807 0123

31-12-2009 यानी  2009 के आखिर तक मुंबई राशनिंग डिपार्टमेंट ने मुंबई वासियों को दिए गए राशन कार्ड का विवरण,

परिमंडल Total
नारंगी 497255 428755 815577 546556 2288133
peele 1037 54 3071 424 4586
सफ़ेद 84294 90164 101192 108238 383888
अन्त्योदय 253 192 1208 179 1832
वी .अन्त्योदय 253 73 606 173 1105
बेघर 1181 278 933 254 2646
गिरनी  कामगार 1471 606 1372 161 3610
तात्पुरत्या 882 118 366 594 1960
अन्नपूर्ण 2045 1045 4694 2584 10368
कार्ड की संख्या 588671 521275 929019 659163 2698128


परिमंडल दुकाने
A 491
D 491
E 1085
G 619
Total 2686
  • Print
  • Digg
  • del.icio.us
  • Facebook
  • Google Bookmarks
  • email
  • Live
  • PDF
  • RSS
  • StumbleUpon
  • Technorati
  • Twitter

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <strike> <strong>